9:16, 4:5, 1:1 या 16:9: सही आस्पेक्ट रेशियो कैसे चुनें
ग़लत आकार जितनी ख़ामोशी से किसी अच्छे वीडियो को बिगाड़ता है, उतना कुछ और नहीं: किनारों पर पट्टियाँ, एक्शन के बीच से कटा फ़्रेम, डाक टिकट जितना छोटा हो गया कोलाज। आस्पेक्ट रेशियो एक टैप का फ़ैसला है — बशर्ते आपको पता हो कि हर प्लेटफ़ॉर्म असल में क्या चाहता है। यह रहा काम का नक्शा।
चार रेशियो, जो मायने रखते हैं
9:16 (वर्टिकल) आम तरह से पकड़े गए फ़ोन की पूरी स्क्रीन भरता है। यह TikTok, Instagram Reels, YouTube Shorts, स्टोरी और Snapchat का अपना आकार है। फ़ुल-स्क्रीन का मतलब है पूरा ध्यान — कोई इंटरफ़ेस आपके वीडियो को ख़ाली जगह के बीच नहीं घेरता।
1:1 (स्क्वेयर) फ़ीड का आकार है। यह Instagram की फ़ीड पोस्ट पर काम करता है और फ़ोन व डेस्कटॉप, दोनों पर साफ़ दिखता है। ग्रिड वाले वीडियो कोलाज के लिए भी स्क्वेयर सबसे स्वाभाविक कैनवस है — टाइलों का अनुपात सहज बना रहता है।
4:5 (पोर्ट्रेट) सबसे लंबा आकार है, जिसे Instagram और Facebook की फ़ीड पूरा दिखाती है। यह स्क्वेयर से ज़्यादा स्क्रीन घेरता है, फिर भी फ़ीड पोस्ट ही रहता है — जब वीडियो फ़ीड के लिए हो, तो यही सबसे अच्छा डिफ़ॉल्ट है।
16:9 (हॉरिज़ॉन्टल) क्लासिक YouTube और डेस्कटॉप का आकार है। टीवी जैसा, प्रेज़ेंटेशन जैसा। फ़ोन पर यह वर्टिकल स्क्रीन के अंदर छोटा दिखता है, इसलिए इसे तभी इस्तेमाल करें, जब वीडियो सच में हॉरिज़ॉन्टल स्क्रीन के लिए हो।
प्लेटफ़ॉर्म के हिसाब से चीट शीट
- TikTok, Reels, Shorts, स्टोरी → 9:16, किसी अपवाद की ज़रूरत नहीं।
- Instagram / Facebook फ़ीड पोस्ट → फ़ीड में ज़्यादा से ज़्यादा जगह के लिए 4:5, या क्लासिक स्क्वेयर के लिए 1:1।
- YouTube के मुख्य वीडियो → 16:9।
- पक्का नहीं कि वीडियो कहाँ जाएगा → 9:16 और 4:5 में एक्सपोर्ट करें और हर एक को उसकी सही जगह पोस्ट करें।
आस्पेक्ट रेशियो और ख़ास तौर पर कोलाज
लेआउट और रेशियो साथ मिलकर काम करते हैं: लेआउट तब सबसे अच्छा लगता है, जब हर टाइल का आकार लगभग उसके अंदर की क्लिप जैसा हो। 2×2 ग्रिड में चार वर्टिकल क्लिप 9:16 फ़्रेम को बिल्कुल भर देती हैं, और ऊपर-नीचे रखी तीन हॉरिज़ॉन्टल क्लिप उसमें लगभग पूरी तरह फ़िट हो जाती हैं। साथ-साथ या ऊपर-नीचे रखी दो क्लिप से लगभग स्क्वेयर फ़्रेम बनता है — वे 1:1 या 4:5 में सबसे अच्छी लगती हैं, जबकि 9:16 में हर क्लिप का सिर्फ़ बीच का हिस्सा बचता है। जब लेआउट और रेशियो मेल नहीं खाते, तो टाइलें पतली हो जाती हैं और कंटेंट कट जाता है — अगर लेआउट तंग लगे, तो क्लिप बदलने से पहले रेशियो बदलें।
सबसे असरदार वर्कफ़्लो: कोलाज एक बार बनाएँ, दो बार एक्सपोर्ट करें। जिस कोलाज ऐप में रेशियो चुनने का विकल्प हो, वह आपके लेआउट को हर आकार के हिसाब से फिर से सजा देता है — एक ही प्रोजेक्ट दो रेंडर में Reel (9:16) और फ़ीड पोस्ट (4:5) बन जाता है। Video Grid Collage में नौ रेशियो हैं, जिनमें 9:16, 4:5, 1:1, 3:4 और 16:9 शामिल हैं।
Video Grid Collage एक नज़र में
- आपका पहला प्रोजेक्ट मुफ़्त है, और उसे आप जितनी बार चाहें एक्सपोर्ट कर सकते हैं
- कोई वॉटरमार्क नहीं, कोई विज्ञापन नहीं और साइन-अप की ज़रूरत नहीं
- सालाना Pro प्लान पर 3 दिन का फ़्री ट्रायल
- स्क्रीन पर एक साथ 9 तक वीडियो, और हर सेल में एक के बाद एक कई क्लिप — एक कोलाज में 100 तक क्लिप
- 100 लेआउट, साथ ही एनिमेटेड, पज़ल और ग्रेडिएंट टेम्पलेट
- वीडियो और फ़ोटो को फ़ुल-फ़्रेम लेयर की तरह 8 ब्लेंड मोड से मिलाएँ, जैसे स्क्रीन, मल्टिप्लाई और ओवरले, और हर लेयर की ओपैसिटी अलग से सेट करें
- एनिमेशन वाले टेक्स्ट और टाइटल, ऑटो कैप्शन, संगीत, ओवरले और बैकग्राउंड हटाने का टूल
- HDR के साथ 60 fps पर 4K तक एक्सपोर्ट, 9 आस्पेक्ट रेशियो में: 9:16, 4:5, 1:1, 16:9 और अन्य
- iPhone के लिए, और Apple silicon वाले Mac और Apple Vision Pro के लिए भी
ख़ुद आज़माएँ — मुफ़्त में
Video Grid Collage · App Store पर 4.9 · 100 लेआउट, एक कोलाज में 100 तक क्लिप